मैं कौन हूँ? ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब २७ सालों के बाद भी मैं नहीं ढूंढ़ पाया हूँ... पर यकीन मानिए रोज कोशिश करता हूँ इस जवाब को ढूंढने का. आखिर मेरा क्या अस्तित्व है... मैं कौन हूँ??? मैं रोज सुबह इसलिए नहीं जागना चाहता कि मुझे उठ कर ऑफिस जाना है, रात को इसलिए नहीं सोना चाहता कि सुबह ऑफिस जाने के लिए उठना है... मैं सोना चाहता हूँ खुद के लिए, जागना चाहता हूँ खुद के लिए... कुछ ऐसा करना चाहता जिससे मुझे ख़ुशी मिले, संतुष्टि मिले, जिस काम को कर मेरा दिल खुश हो... जिससे मुझे गर्व की अनुभूति हो...
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रविवार, 21 फरवरी 2010

विधायक की आजा नच ले!

लोगों को कहते सुना है कि बिहार की तस्वीर बदल रही है। सीएम नीतीश कुमार और उनके दरबारी बिहार की सूरत बदलने में लगे हुए हैं। लेकिन उसी बिहार की राजधानी में उनके ही विधायक ने जो किया.. उससे उनके सारे किए धरे पर पानी फिरता दिख रहा है। भय और भ्रष्टाचार से मुक्त शासन का दावा करने वाली सरकार के लिए शनिवार की रात विधायक निवास में हुई घटना गले की हड्डी बन गया है। यहां जनता दल यूनाइटेड के नाचता जीरादेई से विधायक श्याम बहादुर सिंह रातभर बार बालाओं के साथ भौंडा डांस करते रहे। हद तो ये है कि विधायक महोदय नाचने के दौरान अपनी सुधबुध ऐसे खो चुके थे कि उन्हें ये होश नहीं रहा कि उनकी हरकतों पर कैमरों की निगाह है। मीडिया ने जब पूरे मामले से पर्दा उठा दिया तो पहले तो श्याम बहादुर सिंह होली के मौके पर मनोरंजन की बात कहते रहे... बात इस पर भी नहीं बनी तो दूसरों का उदाहरण देकर अपनी गलती ढांकने की कोशिश की और इस पर बवाल होता देख उन्होंने कैमरे के सामने कान पकड़कर और हाथ जोड़ कर माफी मांग ली। लेकिन सवाल तो ये है कि जब जनप्रतिनिधि ही ऐसे हो तो जनता से किस आचरण की उम्मीद की जाए? होली के नाम पर अश्लीलता और फूहड़ता की हद कहां तक जायज है? ऐसे लोगों को क्या सत्ता में रहने का कोई हक है?

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