शुभ प्रभात मेरे सभी ब्लॉगर बंधुओं को.... जब से लिखना छोड़ा है सच बताऊँ बड़ा सुकून है मन में... कई लोगों के फ़ोन आये, कई ने मेल किया कुछ ने सीधे वार्तालाप किया... सबने कहा आखिर लिखना क्यों छोड़ दिया... मत छोडो लिखते रहो... अँधेरे से उजाले की ओर आने का सबसे सशक्त माध्यम है... वगैरह-वगैरह... उन सबके लिए एक छोटी सी बात... जहाँ तक मैं सोंचता हूँ किसी भी काम के लिए तीन चीजों का होना अति-आवश्यक है... इच्छा, उत्साह और वजह.... जब तीनों में से एक भी कम हो तो व्यक्ति किसी भी काम को अंजाम नहीं दे सकता... कला किसी बंधुआ मजदूरी की तरह नहीं होती कि आपको उसे जबरन करना ही पड़ेगा... उसके लिए इच्छा, उत्साह और वजह तीनों का बराबर सम्मिलन होना चाहिए... और मेरे पास तो अब एक भी नहीं है... बस इसलिए लिखने से तौबा कर ली मैंने... कयिओं ने पूछा कि आखिर ऐसा क्यों किया... तो इसका मेरे पास कोई ठोस कारण नहीं है... बस पिछले १६ महीनों के मजाक से थक गया था... जिंदगी और लोगों ने इतना बढ़िया मजाक किया मेरे साथ कि उस मजाक पे अब मेरे दर्द जिन्दगी भर खिलखिलायेंगे... मेरे आंसू मौत तक मुस्कुराएंगे... आप सबने मेरे बारे में सोंचा... मेरा साथ दिया इसके लिए मैं आप सबको तहे-दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ... कुछ टूटे-फूटे अल्फाजों और बिखरे हुए शब्दों को पसंद कर आप लोगों ने ही मेरे अन्दर एक कवि, एक लेखक होने का अहसास पैदा करा दिया था... पर सच तो ये है कि मैं कभी कुछ था ही नहीं और आज भी कुछ भी नहीं... आप सबका एक बार फिर से धन्यवाद...
मृदा
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अति विस्तृत
पर खंडित-खंडित,
जीवन परिचारक
पर स्वयं निर्जीव।
हिमालय से अपरदित
मैदान में तलछट,
मैं मृदा...
9 घंटे पहले








