मैं कौन हूँ? ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब २७ सालों के बाद भी मैं नहीं ढूंढ़ पाया हूँ... पर यकीन मानिए रोज कोशिश करता हूँ इस जवाब को ढूंढने का. आखिर मेरा क्या अस्तित्व है... मैं कौन हूँ??? मैं रोज सुबह इसलिए नहीं जागना चाहता कि मुझे उठ कर ऑफिस जाना है, रात को इसलिए नहीं सोना चाहता कि सुबह ऑफिस जाने के लिए उठना है... मैं सोना चाहता हूँ खुद के लिए, जागना चाहता हूँ खुद के लिए... कुछ ऐसा करना चाहता जिससे मुझे ख़ुशी मिले, संतुष्टि मिले, जिस काम को कर मेरा दिल खुश हो... जिससे मुझे गर्व की अनुभूति हो...
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शनिवार, 28 अप्रैल 2012

आज मैं उड़ना चाहता हूँ...

आज मैं उड़ना चाहता हूँ
खुले आकाश में...
समुन्दर के पार...
नदियों के साथ उड़ना चाहता हूँ
मेरे शब्दों के पर लगा के उड़ना चाहता हूँ
पर्वतों को हथेली पे उठा के...
आकाश को बदन पे लपेट के...
हवाओं को मुट्ठी में बंद करके उड़ना चाहता हूँ
तेरे प्यार को किस्मत बना के उड़ना चाहता हूँ
फूलों की खुशबुओं को दिल में बसा के...
काँटों की चुभन को सीने में छुपा के...
जंगलों के आर-पार उड़ना चाहता हूँ
जीवन के नए सहर को आँखों में बसा के उड़ना चाहता हूँ
आज मैं उड़ना चाहता हूँ...
इतना ऊँचा कि सूरज भी सर उठा के देखे मुझे
इतना तेज कि कोई रौशनी भी छू न सके मुझे
आज मैं उड़ना चाहता हूँ...
तेरे संग मैं दुनिया के पार तक उड़ना चाहता हूँ...
आज मैं उड़ना चाहता हूँ...

2 कुछ आपकी खामोशी:

kshama ने कहा…

Khoob unchai hasil ho aapko1 Badee hee khoobsoorat rachana!

रविकर फैजाबादी ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति ।

बधाई स्वीकारें ।।

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