आज मैं उड़ना चाहता हूँ
खुले आकाश में...
समुन्दर के पार...
नदियों के साथ उड़ना चाहता हूँ
मेरे शब्दों के पर लगा के उड़ना चाहता हूँ
पर्वतों को हथेली पे उठा के...
आकाश को बदन पे लपेट के...
हवाओं को मुट्ठी में बंद करके उड़ना चाहता हूँ
तेरे प्यार को किस्मत बना के उड़ना चाहता हूँ
फूलों की खुशबुओं को दिल में बसा के...
काँटों की चुभन को सीने में छुपा के...
जंगलों के आर-पार उड़ना चाहता हूँ
जीवन के नए सहर को आँखों में बसा के उड़ना चाहता हूँ
आज मैं उड़ना चाहता हूँ...
इतना ऊँचा कि सूरज भी सर उठा के देखे मुझे
इतना तेज कि कोई रौशनी भी छू न सके मुझे
आज मैं उड़ना चाहता हूँ...
तेरे संग मैं दुनिया के पार तक उड़ना चाहता हूँ...
आज मैं उड़ना चाहता हूँ...










2 कुछ आपकी खामोशी:
Khoob unchai hasil ho aapko1 Badee hee khoobsoorat rachana!
सुन्दर प्रस्तुति ।
बधाई स्वीकारें ।।
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