मैं कौन हूँ? ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब २७ सालों के बाद भी मैं नहीं ढूंढ़ पाया हूँ... पर यकीन मानिए रोज कोशिश करता हूँ इस जवाब को ढूंढने का. आखिर मेरा क्या अस्तित्व है... मैं कौन हूँ??? मैं रोज सुबह इसलिए नहीं जागना चाहता कि मुझे उठ कर ऑफिस जाना है, रात को इसलिए नहीं सोना चाहता कि सुबह ऑफिस जाने के लिए उठना है... मैं सोना चाहता हूँ खुद के लिए, जागना चाहता हूँ खुद के लिए... कुछ ऐसा करना चाहता जिससे मुझे ख़ुशी मिले, संतुष्टि मिले, जिस काम को कर मेरा दिल खुश हो... जिससे मुझे गर्व की अनुभूति हो...
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बुधवार, 7 मार्च 2012

आप लोग जाओ और मनाओ उमंग से होली...


कल होली और भाई अपन होली में थोड़े ज्यादा ही बीजी होते है तो सोंचा आप सबको अपना सलाम आज ही कह दूँ... वो क्या है कि अपन होली वाले दिन मतलब पुरे दिन मस्ती में घर में बैठते है.... मटन-चिकन खाते है.... टीवी-सीवी देखते है और... घंटों फ़ोन पर लोगों को होली का बुरा न मानने की सलाह देते है... भाई और जब इन सबसे थोडा वक़्त बच जाये तो ज़रा देर के लिए शरीर और दिमाग का आराम का ख्याल करते हुए सो लेते है.... भैये क्या करें हम तो अपने हर पल का भरपूर मजा लेते है.... खाना, सोना और टीवी देखना... और भी कुछ है क्या जरूरी इस जिंदगी में... खामख्वाह में हम दूसरों को तंग नहीं करते... अब देखो भैया कल है होली... और जो हमने होली में रंग डाल किसी को तो बेकार में नाक-भौंह सिकोड़ लेगा... सामने तो लिहाज से देगा नहीं पर मन में कई गालियाँ देगा... अब भैया ये तो मनुष्य की प्रकृति है... स्वर्ग सब जाना चाहते है पर मरना कोई नहीं चाहता... वैसे ही होली सब खेलना चाहते है पर रंग लगा दो तो मान लेंगे बुरा... खैर मानने दो बुरा उन्हें... मुझे क्या पड़ी है... अपन तो ज्यादा वैल्यू देते नहीं किसी को... भाई खुद से समय नहीं दूसरों को कहाँ से दे... और वैसे भी क्यों दे... सबको चौबीस घंटे मिलते है, न एक सेकण्ड कम न ज्यादा फिर हम अपना समय क्यों दे... हम नहीं देंगे... जिनको देना है दें... थोडा हमें भी दें... अरे इन सबके बीच तो भूल ही गया कि कल होली है... लेकिन आखिर मुझे क्या है तो है... मेरा क्या... उफ्फ्फ इस भांग ने तो गजब का असर डाल दिया है... पता नहीं क्या बकवास कर रहा हूँ... क्या कहा आपने मैं बकवास कर रहा हूँ?... कर रहा हूँ तो कर रहा हूँ आपका क्या... पर खैर हम बुरा नहीं मानते... क्योंकि कहते है न कि बुरा न मानो होली है.... आप सभी बुरा न माने... और मेरे दिल से निकली होली की मुबारकबाद को कबूल करें.... अरे ये क्या मैंने दिल से अभी - अभी कुछ निकाला है क्या... उफ्फ्फ्फ़ न जाने क्या होगा मेरा.... आप लोग जाओ और मनाओ उमंग से होली... हैप्पी होली... मुबारक होली.... और हाँ हर बार की तरह इस बार भी चित्र चुराया गूगल देवता के दरबार से.... गूगल देव बुरा न माने होली है...

3 कुछ आपकी खामोशी:

पंछी ने कहा…

holi ki shubhkamnaye

sushma 'आहुति' ने कहा…

बहुत ही खुबसूरत रंगों से भरा हो आपका होली का त्यौहार.....

मदन शर्मा ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति ....होली एवं अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं जी आपको

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