मैं कौन हूँ? ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब २७ सालों के बाद भी मैं नहीं ढूंढ़ पाया हूँ... पर यकीन मानिए रोज कोशिश करता हूँ इस जवाब को ढूंढने का. आखिर मेरा क्या अस्तित्व है... मैं कौन हूँ??? मैं रोज सुबह इसलिए नहीं जागना चाहता कि मुझे उठ कर ऑफिस जाना है, रात को इसलिए नहीं सोना चाहता कि सुबह ऑफिस जाने के लिए उठना है... मैं सोना चाहता हूँ खुद के लिए, जागना चाहता हूँ खुद के लिए... कुछ ऐसा करना चाहता जिससे मुझे ख़ुशी मिले, संतुष्टि मिले, जिस काम को कर मेरा दिल खुश हो... जिससे मुझे गर्व की अनुभूति हो...
मुझसे संपर्क साधना बहुत आसान है... ab8oct@gmail.com पर मेल कर सकते है, http://ab8oct.blogspot.com/, http://humarinayisubah.blogspot.com/ पर मेरे विचारों को पढ़ सकते है....
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मंगलवार, 6 मार्च 2012

हकीक़त का है आलिंगन....


आज अपने कलम पर जोर दे रहा हूँ... कई दिनों से शब्दों ने अन्दर एक बेचैनी सी पैदा कर राखी थी, सोंचा आज अपनी छटपटाहट को ख़त्म कर लूँ... होली नजदीक है और मेरे पास आप लोगों के लिए यही कुछ रंग बचे पड़े है.... उम्मीद है मेरे ये शब्दों के बेमेल जोड़ आपको अच्छे लगेंगे... (चित्रों के लिए गूगल बाबा का सहारा)

उसकी अहसासों की छुअन
खामोश होती मेरी धड़कन
ये चंचल सा मेरा मन
उड़ने को चाहे खुले गगन
नदियों की स्थिरता
और ठहरा हुआ पवन
नयी उम्मीदों की तरंग
अँधेरे को करती वो रौशन
अनचाही डर की अगन
बढ़ाती मेरी तडपन
मेरे जीवन में उसका आगमन
कही भीतर एक सुखन
अब तक था एक अकेलापन
बदलता मेरा अब जीवन
न जाने कैसा होगा आने वाला क्षण
सपनो की दुनिया टूट चुकी कब की मेरी
अब तो बस हकीक़त का है आलिंगन....

4 कुछ आपकी खामोशी:

kshama ने कहा…

Bahut sundar rachana!
Holi kee anek shubh kamnayen!

sushma 'आहुति' ने कहा…

सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

रविकर ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति |

होली है होलो हुलस, हुल्लड़ हुन हुल्लास।
कामयाब काया किलक, होय पूर्ण सब आस ।।

Sonal Rastogi ने कहा…

mausam hee hai aisi rachnao kaa
happy holi

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