आज अपने कलम पर जोर दे रहा हूँ... कई दिनों से शब्दों ने अन्दर एक बेचैनी सी पैदा कर राखी थी, सोंचा आज अपनी छटपटाहट को ख़त्म कर लूँ... होली नजदीक है और मेरे पास आप लोगों के लिए यही कुछ रंग बचे पड़े है.... उम्मीद है मेरे ये शब्दों के बेमेल जोड़ आपको अच्छे लगेंगे... (चित्रों के लिए गूगल बाबा का सहारा)
उसकी अहसासों की छुअन
खामोश होती मेरी धड़कन
ये चंचल सा मेरा मन
उड़ने को चाहे खुले गगन
नदियों की स्थिरता
और ठहरा हुआ पवन
नयी उम्मीदों की तरंग
अँधेरे को करती वो रौशन
अनचाही डर की अगन
बढ़ाती मेरी तडपन
मेरे जीवन में उसका आगमन
कही भीतर एक सुखन
अब तक था एक अकेलापन
बदलता मेरा अब जीवन
न जाने कैसा होगा आने वाला क्षण
सपनो की दुनिया टूट चुकी कब की मेरी
अब तो बस हकीक़त का है आलिंगन....











4 कुछ आपकी खामोशी:
Bahut sundar rachana!
Holi kee anek shubh kamnayen!
सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....
सुन्दर प्रस्तुति |
होली है होलो हुलस, हुल्लड़ हुन हुल्लास।
कामयाब काया किलक, होय पूर्ण सब आस ।।
mausam hee hai aisi rachnao kaa
happy holi
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