मैं कौन हूँ? ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब २७ सालों के बाद भी मैं नहीं ढूंढ़ पाया हूँ... पर यकीन मानिए रोज कोशिश करता हूँ इस जवाब को ढूंढने का. आखिर मेरा क्या अस्तित्व है... मैं कौन हूँ??? मैं रोज सुबह इसलिए नहीं जागना चाहता कि मुझे उठ कर ऑफिस जाना है, रात को इसलिए नहीं सोना चाहता कि सुबह ऑफिस जाने के लिए उठना है... मैं सोना चाहता हूँ खुद के लिए, जागना चाहता हूँ खुद के लिए... कुछ ऐसा करना चाहता जिससे मुझे ख़ुशी मिले, संतुष्टि मिले, जिस काम को कर मेरा दिल खुश हो... जिससे मुझे गर्व की अनुभूति हो...
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शुक्रवार, 2 मार्च 2012

महिला-पुरुष बराबरी युग में इतना भेद-भाव क्यों???

कल रात फिर एक बार गलती कर गया. वैसे इस गलती में मेरा कोई कसूर नहीं है. वो क्या हुआ कि ऑफिस से वापसी में मैं चला गया अपने एक मित्र के घर और मेरे मित्र ने लगा रखी थी एक न्यूज़ चैनल. अब आप समझ गए होंगे कि क्या गलती हो गयी. उफ़ कल रात फिर न्यूज़ देख ली मैंने. हे भगवन! बचा ले मुझे इस पाप से.

हाँ तो बात ये है.... सॉरी सॉरी सॉरी न्यूज़ ये है कि कल किसी प्रदेश के किसी अदालत ने किसी व्यक्ति को दहेज़ प्रतारना आरोप से मुक्त कर दिया. भाई अच्छी बात है (कम-से-कम अदालत के चक्कर से मुक्ति तो मिली).... जिस लड़की ने ये आरोप लगाते हुए लगभग ९ साल पहले उस लड़के की बारात को घर से वापिस लौटा दिया था, उस लड़की को उस वक़्त हमारी देशी और विदेशी मीडिया ने काफी तवज्जो दी थी. कई संस्थाओं ने उसे आयरन-लेडी तक कहा और कई ने तो कितने ही पुरस्कार दे डाले. भाई देने भी चाहिए थे... आखिर बहुत बहादुरी का काम किया था उसने. (हमारे देश में लड़की ने आवाज उठाई यही बहुत बड़ी बहादुरी की बात है)... पर ९ साल के बाद अदालत ने उस लड़की को झूठा कैसे साबित कर दिया? आखिर ९ साल के बाद अदालत को ये बात पता चली जो उस वक़्त किसी को नहीं पता थी? कमाल है... खैर ये तो हमारे देश की अदालत का स्टायल है कि किसी भी बात का पता लगने में उसे सदियों लग जाते है.... 

पर मुद्दा ये नहीं है.... मुद्दा ये है कि लड़के को क्या मिला? बेइज्जती, जेल, बदनामी और बेगुनाह होते हुए भी सजा.... और लड़की को क्या मिला? पुरस्कार, नाम, सम्मान और गुनाहगार होते हुए भी इज्जत.... भाई यही तो है महिला होने के फायदे... इस देश में महिलाओं के लिए कई क़ानून है... जो जरूरी भी है पर उनका दुरुपयोग भी उसी स्तर पर होता रहा है... क्या अदालत के इस फैसले से उस लड़के के जिंदगी के वो नौ साल वापस मिल जायेंगे? लड़की की तो उस घटना के एक साल के बाद शादी हो गयी थी... मतलब पिछले आठ सालों से लड़की एक खुशहाल जीवन जी रही होगी (अगर उसने वहां भी कोई झूठ नहीं कहा होगा)... पर लड़के ने पिछले नौ सालों तक जिस मानसिक वेदना को जिया है उसका फल उसे कौन दिलाएगा? क्या उस झूठी लड़की को कड़ी सजा नहीं मिलनी चाहिए जिससे कि और ऐसी दूसरी लड़कियों को सबक मिल सके?

महिला क़ानून बहुत जरूरी है और इसका मैं पूरा समर्थक हूँ पर ऐसे भी उपाय होने चाहिए जिससे कि बेगुनाह न फंस सके इस क़ानून के जाल में. क्या हर बार एक लड़का ही गलत होता है? ऐसे कई वाकये मैंने सुने और देखे भी है जब किसी लड़की ने झूठे आरोप में लड़के को दहेज़ प्रतारना और यहाँ तक कि बलात्कार के केस तक में सजा दिलवाई है. क्या मानसिक वेदना सिर्फ एक पुरुष ही औरत को देता है? मैंने तो कई ऐसे घर-परिवार देखे है जहाँ महिला के कारण पुरुष मानसिक वेदना झेल रहा है... ऐसे में वो पुरुष कहाँ फ़रियाद करे? चलिए नीचे दो स्थितियां दे रहा हूँ और उसके दो परिणाम भी.... शायद कोई त्रुटी कर जाऊं अपने कम दिमाग से तो मुझे अवश्य सूचित कीजियेगा...

स्थिति एक: एक लड़का और एक लड़की एक दुसरे से दो साल से प्यार करते है. उनके बीच कुछ असामाजिक सम्बन्ध भी होते है. किसी कारणवश लड़का शादी से इन्कार करता है. लड़की को मानसिक वेदना से गुजरना पड़ता है.
परिणाम एक: लड़की लड़के के खिलाफ या उसे पाने के लिए फ़रियाद कर सकती है. लड़की उस पर दो साल तक उसे भावनात्मक रूप से बेवकूफ बना कर यौन-शोषण का आरोप लगा सकती है.

स्थिति एक: एक लड़का और एक लड़की एक दुसरे से दो साल से प्यार करते है. उनके बीच कुछ असामाजिक सम्बन्ध भी होते है. किसी कारणवश लड़की शादी से इन्कार करती है. लड़के को मानसिक वेदना से गुजरना पड़ता है.
परिणाम दो: लड़का परिणाम एक जैसा कुछ नहीं कर सकता.

क्या सिर्फ लड़कियों की भावनाएं होती है लडको की नहीं? आखिर आज के महिला-पुरुष बराबरी युग में इतना भेद-भाव क्यों???

2 कुछ आपकी खामोशी:

dheerendra ने कहा…

क़ानून तो क़ानून है,पर अंग्रेजो के जमाने के,बदलाव आवश्कता है,लड़का निर्दोष है तो लड़की को सजा मिलनी चाहिए,...

पोस्ट पर आने के लिए आभार,...

मत बाँटों इंसान को ने कहा…

baat ladki ya ladke ki nahi hai..baat hai kanun vyavstha ki...sahi kanun vyavstha ke abhav mein koi bhi akarn saja bhugat sakta hai fir chahe vo ladki ho ya ladka...isliye kanun mein sudhar apekshit hai aur vo bhi har mamle mein..

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