सितारे बिखर न पाएं...

बुधवार, 22 फरवरी 2012
आज की सुबह लगता है कुछ बदला लेने की नियत से आई है मुझसे... अफ़ी-अभी ऑफिस पहुंचा हूँ. आदत के अनुसार सबसे पहले एक-आध ब्लॉग पढता हूँ. और आज तो सबसे पहले "बिखरे-सितारे" पढने का मौका मिल गया. लेकिन आखिर ये मौका मुझे मिला ही क्यों? क्यों आज की सुबह ऐसा प्रतीत करवा रही है जैसे शाम के अँधेरे में हूँ? एक अनजाना-अनचाहा डर क्यों मन में समां गया है?


हमारी एक ब्लॉगर साथी मिसेज शमा काव्या जी दिल के दौरे का शिकार हो गयी हैं और अस्पताल में अपने स्वस्थ्य लाभ के लिए पुरजोर कोशिश कर रही हैं. आप सब ब्लॉगर साथियों से विनम्र निवेदन है की उनके जल्द स्वास्थय लाभ के लिए दुआ करें.

इस पोस्ट को लिखते-लिख्ते अभी मैंने उनसे संपर्क किया उनका कुशल-क्षेम जानने के लिए. जानकार हार्दिक ख़ुशी हुई की वो अस्पताल से अपने घर वापस आ गयी है. उन्ही के अनुसार उन्हें पूर्ण स्वस्थ होने में चार से पांच महीने का वक़्त लगेगा. मैं उनके लिए दुआ करता हूँ कि वो जल्द स्वस्थ हो और हम सबके बीच उसी उत्साह और लगन के साथ अपनी लेखनी ले कर प्रस्तुत हो.

(चित्र शभार: शमा जी के प्रोफाइल से)

2 कुछ आपकी खामोशी:

  1. kshama ने कहा…:

    Bahut,bahut dhanywad!

  1. sushma 'आहुति' ने कहा…:

    बेहतरीन भाव ... प्रभावशाली प्रस्तुति

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