कुछ ही देर पहले देखा इसे... न जाने क्यों इतने दिनों से महरूम था इससे मैं... किसी कवि का नहीं एक पिता का ह्रदय समाया है इसमें... आप सबके साथ बाँट रहा हूँ....
बवाल है बवाल है !
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बवाल है बवाल है
बड़ा अजब हाल है
लापता से तंत्र में
ये कौम बेहाल है
पटरी से उतर गई
मालामाल कर गई
मामा की रेल है
भांजा निहाल है
राष्ट्र के गले पड़े
रा...
6 घंटे पहले









3 कुछ आपकी खामोशी:
आपकी प्रवि्ष्टी की चर्चा कल बुधवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल उद्देश्य से दी जा रही है!
sensible work , appreciable..
देख नहीं पाया इसे आपके ब्लॉग पे ... कुछ नज़र नहीं आया ...
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