मैं कौन हूँ? ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब २७ सालों के बाद भी मैं नहीं ढूंढ़ पाया हूँ... पर यकीन मानिए रोज कोशिश करता हूँ इस जवाब को ढूंढने का. आखिर मेरा क्या अस्तित्व है... मैं कौन हूँ??? मैं रोज सुबह इसलिए नहीं जागना चाहता कि मुझे उठ कर ऑफिस जाना है, रात को इसलिए नहीं सोना चाहता कि सुबह ऑफिस जाने के लिए उठना है... मैं सोना चाहता हूँ खुद के लिए, जागना चाहता हूँ खुद के लिए... कुछ ऐसा करना चाहता जिससे मुझे ख़ुशी मिले, संतुष्टि मिले, जिस काम को कर मेरा दिल खुश हो... जिससे मुझे गर्व की अनुभूति हो...
मुझसे संपर्क साधना बहुत आसान है... ab8oct@gmail.com पर मेल कर सकते है, http://ab8oct.blogspot.com/, http://humarinayisubah.blogspot.com/ पर मेरे विचारों को पढ़ सकते है....
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रविवार, 25 सितम्बर 2011

मेरी भगनी... सिद्धीश्री

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मेरी भगनी कपडे धो रही है... क्या करेगी आखिर माँ भी जॉब करती है और उसके पा भी... घर का काम तो उसे ही करना होगा न... 

6 कुछ आपकी खामोशी:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

इस उत्कृष्ट वीडियोप्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! यदि अधिक से अधिक पाठक आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

संजय भास्कर ने कहा…

... बेहद प्रभावशाली

सदा ने कहा…

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

Babli ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत ! शानदार प्रस्तुती!
आपको एवं आपके परिवार को नवरात्रि पर्व की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनायें !

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

बहुत सुंदर।

जन्‍मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ!
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एक यादगार सम्‍मेलन...
...तीन साल में चार गुनी वृद्धि।

बेनामी ने कहा…

You're totally correct with this writing!

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