मैं कौन हूँ? ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब २७ सालों के बाद भी मैं नहीं ढूंढ़ पाया हूँ... पर यकीन मानिए रोज कोशिश करता हूँ इस जवाब को ढूंढने का. आखिर मेरा क्या अस्तित्व है... मैं कौन हूँ??? मैं रोज सुबह इसलिए नहीं जागना चाहता कि मुझे उठ कर ऑफिस जाना है, रात को इसलिए नहीं सोना चाहता कि सुबह ऑफिस जाने के लिए उठना है... मैं सोना चाहता हूँ खुद के लिए, जागना चाहता हूँ खुद के लिए... कुछ ऐसा करना चाहता जिससे मुझे ख़ुशी मिले, संतुष्टि मिले, जिस काम को कर मेरा दिल खुश हो... जिससे मुझे गर्व की अनुभूति हो...
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शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

खामोशी ... सब कुछ कहती है (अविनाश वाचस्‍पति)


सब कुछ कहती है
खामोशी
जो रह जाता है
कहने से सदा।

खामोशी तो है
सदा से ही
कहने की एक
कातिल अदा।

खामोशी को
बदलते हैं जो
उदासी में
वे छीनते हैं
सबका मजा।

खामोशी
एक कायराना
हरकत नहीं
साहस की
बेमिसालीय
मिसाल है।

खामोशी की
नहीं होती है
राशि
जैसे राशि की
नहीं होती है
राशि।

खामोशी की
जमाराशि इन सबसे
बहुत अधिक है
कहीं अधिक है
आपको मालूम है
नहीं मालूम
तो अब मान लो।

खामोशी को
इसकी संपूर्णता में
पहचान लो
जान लो
पर बेवजह
खामोशी की भी
मत जान लो
जीने दो
खामोशी को
शोर की तरह।

चित्र भी पहचानना होगा

10 कुछ आपकी खामोशी:

Vivek Rastogi ने कहा…

इसलिये हम भी खामोश हैं।

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

शांत रहते हुए चित्र पहचानना भी एक कला है। उसे पहचानने के लिए तो नहीं किया मना है। लिख दें, शब्‍द शोर मचाते हुए भी खामोश ही रहते हैं। उनका रहना ही बतलाना है।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

mere sang meri khamoshi hi guftagu karti hai

ललित शर्मा ने कहा…

खामोशियों मे ही तुफ़ान पलते हैं
पिघलने पर ही फ़ौलाद ढलते हैं
छल कर जाते हैं खामोश देखकर
अंगारे भीतर ही सुलगते रहते हैं

मनोज कुमार ने कहा…

पहले ख़ामोशी से बोल दूं
मन की गांठें खोल दूं।
बात बिलकुल सच्ची है
आपकी कविता बहुत अच्छी है
अब ख़ामोशी तोड़ता हूं
शत्रु जी का डायल़ग छोड़ता हूं
"ख़ामोश !!!"

अमिताभ श्रीवास्तव ने कहा…

badi hi khaamoshi se mene jese hi ye blog open kiya achanak mere saamne dog ke piile ka photo aan padaa, meri khamoshi me pahla khalal.., fir jab rachna padhhi to vichaaro ne aour is baat ne ki khaamoshi vakai bahut kuchh kah jaati he..ne khalal daalaa..., ab bataiye..khamoshi kese paau??

अभिषेक प्रसाद 'अवि' ने कहा…

avinash bhayi ki khamoshi ne to sach sab kuchh kah diya...

vedvyathit ने कहा…

kripya mere blog pr meri " maun " kivta pd kr khamoshi ka raj jane main koshis kroonga ki use aap ko bhej skoon
vaise khamoshi khamoshi nhi hoti jroori nhi muh hee bole aankh bhi boltee hai ,tvcha bolti haimuh ke alava bhi bhut kuch bolta hai prntu hm muh se bolne ko hee bolna smjhte hain n bolne ko khamoshi khne lgte hain kitni bde glti krte hain kash hm us bhasha ko bhi sunne ,janne aur phchannelgen to kitna achcha ho
pti ptni me jhgda n ho bchche maa bap se pyar krne lgen pdosi pyar se rhne lgen prntu khtre bhi hain pr us ke bad sthai smadhan ke bhi vayde hain
dr.vedvyathit@gmail.com

डॉ महेश सिन्हा ने कहा…

लगता है 2010 "खामोशी" का साल है

shashisinghal ने कहा…

कहते हैं एक चुप सौ को हराता है
खामोशी की भी
ठीक यही परिभाषा है ,
कई दफा यही खामोशी
जी का जंजाल भी बनती है ,
मगर
कई दफा बडी़ - बडी़ मुश्किलों से
निजात भी खामोशी ही दिलाती है ।

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