जिन में हो तेरी खुशी
उन जख्मों का भी मुझे इन्तेजार है,
करने को सांझ तेरी रौशन
मैं ख़ुद जलने को भी तैयार हूँ
अगर हो बसी खुशबू तेरी
पतझर भी मेरी बहार है
तेरे खुशियों पर तो हक नही मेरा
तेरे ग़मों पर तो मेरा अधिकार है
एक गुजारिश है
तू न कभी बदलना जीवन के किसी मोड़ पर
मुझे तो तेरे इसी रूप से प्यार है
तू करती है नफरत मुझसे
नफरत ही किया करना,
हो सके तो हद से बढ़कर करना
मुझे तो तेरे नफरत से भी बे-इन्तिहाँ प्यार है
गर तू कभी बदल गई
तो शायद मुश्किल होगी मेरे लिए
किसी दिन अगर तू मेरे पास आई दोबारा
तो मैं मरने के लिए अभी कहाँ तैयार हूँ
मैंने तो कसम ली है तेरे प्यार में ही जीने की
मुझे तो तेरा अपनी अन्तिम साँसों तक इन्तेजार है
तेरी खुशी के लिए जख्म
तेरी रौशनी के लिए जलने को
खुशबू अगर हो तो पतझर
तेरे ग़मों से भी मुझे प्यार है
हाँ मुझे सिर्फ़ तुझसे, सिर्फ़ तुझसे ही प्यार है....
क्यों रुष्ट है माँ गंगा .....?
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मुनि के रेती गंगा के करीब पर यह ...चित्र आज शाम लिए गए
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3 घंटे पहले








