मैं कौन हूँ? ये एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब २७ सालों के बाद भी मैं नहीं ढूंढ़ पाया हूँ... पर यकीन मानिए रोज कोशिश करता हूँ इस जवाब को ढूंढने का. आखिर मेरा क्या अस्तित्व है... मैं कौन हूँ??? मैं रोज सुबह इसलिए नहीं जागना चाहता कि मुझे उठ कर ऑफिस जाना है, रात को इसलिए नहीं सोना चाहता कि सुबह ऑफिस जाने के लिए उठना है... मैं सोना चाहता हूँ खुद के लिए, जागना चाहता हूँ खुद के लिए... कुछ ऐसा करना चाहता जिससे मुझे ख़ुशी मिले, संतुष्टि मिले, जिस काम को कर मेरा दिल खुश हो... जिससे मुझे गर्व की अनुभूति हो...
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शनिवार, 20 जून 2009

नफरत


तुमने कहा तुम्हारे दिल में
अब ना मेरे लिए मोहब्बत है
और ना ही नफरत
आख़िर क्यों कहा तुमने ऐसा
पता है जबसे तुमने ऐसा कहा है
मैं बेचैन हो गया हूँ
लगता है जैसे तुम मुझपर अहसान कर रही हो
मत करो ऐसा तुम, मुझ पर तरस मत खाओ
मुझसे प्यार न करने की
तो वजह समझ सकता हूँ मैं
पर नफरत क्यों नही करती तुम मुझसे
तुम मुझसे नफरत किया करो
खूब नफरत किया करो
हो सके तो नफरत की हद से ज्यादा नफरत करो
क्योंकि तुम जितना ही नफरत करोगी
मेरा प्यार तुम्हारे लिए बढ़ता ही जाएगा….

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