(चित्र बड़ी मुश्किल से पहली बार खुद डिजाइन किया है इस आलेख के हिसाब से)
आज बात परिवारवाद की करता हूँ. अब आप ये मत सोंचने लग जाना कि मैं किसी बड़ी राजनितिक पार्टी का नाम लेने वाला हूँ. क्योंकि ऐसा करने का न कोई मकसद है और न ही कोई फायदा. दुनिया जानती है उस परिवार को, उसके द्वारा किये गए हर गलत काम को, परिवारवाद को बढ़ावा देकर अपना उल्लू सीधा करने को और देश को उल्लू बनाने को, देश को कंगाली की हालात में पहुंचा कर खुद अमीरी की सीढीयाँ चढ़ने को... मैं बस एक मुद्दा उठाना चाहता हूँ, एक ऐसा मुद्दा जो छोटा भले दिखे पर छोटा है नहीं. धोखाधरी (फ्रौड) की श्रेणी में ये अव्वल न हो तो उससे कम भी नहीं होगा. आज ये मुद्दा मेरे दिमाग में इसलिए आया कि हमारे सबसे बड़े परिवारवाद को समर्थन देने वाले राजनितिक पार्टी से ये भी जुड़े है... तो इनमें भी वे गुण तो आयेंगे ही...
साहब बहुत बड़े तो नहीं पर छोटे स्तर पर भी नहीं आते... पर रहने दीजिये बात इसकी नहीं करते... बात करते है उस मुद्दे की... वोटर कार्ड का नाम तो सबने सुना होगा, वोटर लिस्ट में नाम भी होगा (अगर नहीं है लिखवा लीजिये)... आप कई जगह अपना नाम वोटर लिस्ट में लिखवा सकते है... हाँ... मजाक नहीं कर रहा मैं... इस देश में सब संभव है... जहाँ आप रहते है या जहाँ के रहने वाले है वहां नाम लिखाना तो आसान है ही... वहां भी लिखा सकते है जहाँ न आपका निवास है और न कोई निवास प्रमाण-पत्र... अरे आपको तो मेरी बात पे विश्वास ही नहीं हो रहा... देखो यार मैं सीरिअस मुद्दे पर मजाक तो बिलकुल नहीं करता... और अगर आपके परिवार में कोई व्यक्ति राजनीति से जुडा है तब तो बहुत आसान है और अगर वो राजनितिक व्यक्ति किसी स्तर पर भी लीडर है तब तो सोने पे सुहागा...
इस देश में कुछ भी संभव है... कुछ भी का मतलब कुछ भी... पहले तो मैंने सिर्फ ये सुना था कि कोई व्यक्ति कहीं से भी चुनाव लड़ सकता है, वहां से भी जहाँ न वो रहता है और शायद कभी गया भी न हो... उदाहरण के तौर पे आप हमारे प्रधान-मंत्री साहब को ले सकते है... घर उनका पंजाब में है पर सांसद वो असम से है... भाई ये है हमारे अखंड भारत की पहचान... व्यक्ति पुरे देश का है... न कि सिर्फ एक जगह का... वो अलग बात है कि जब आपको कोई सिम कार्ड लेना हो, गाडी खरीदनी हो, ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना हो, लोन लेना हो, घर लेना हो, इत्यादि-इत्यादि तो आपको उस जगह विशेष का प्रमाण-पत्र देना होगा... वरना तो ये सपने छोड़ ही दीजिये..
खैर लगता है मैं मुद्दे से भटक रहा हूँ... मुद्दा तो वोटर लिस्ट में नाम का है... एक व्यक्ति जो रहता शहर अ में है, उसकी पूरी पढाई-लिखाई उसी शहर से होती है, उसके पिता उसी शहर में रहते है, उसका अपना घर उसी शहर में है, जाहिरतौर पर स्कूल-कॉलेज में उसी शहर का पता रजिस्टर्ड होगा... लेकिन उस व्यक्ति का नाम शहर ब के वोटर लिस्ट में लिखा हुआ है और वोटर कार्ड भी शहर ब का बना हुआ है... व्यक्ति शहर ब जा के इमानदारी से अपना वोट भी डालता है इसलिए क्योंकि उसके कोई रिश्तेदार शहर ब के रहने वाले है और वहां से चुनाव लड़ते है और जीतते भी है शायद... अब ये समझ में नहीं आया कि उस व्यक्ति का वोटर कार्ड शहर ब में बना कैसे... घर उसका वहां नहीं है, शिक्षा-दीक्षा भी वहां से नहीं हुई, घर वहां नहीं है, पिता भी वहां नहीं रहते... तो फिर कैसे बना? वोटर कार्ड बनवाते समय उसने प्रमाण कहाँ से उपलब्ध करवाए? उसने साबित कैसे किया कि वो शहर ब का निवासी है? जाहिर तौर पर नेता जी ने ये सब करवाया होगा... पर आखिर क्यों? एक अदद वोट के लिए... क्या नेता जी को अपने कार्य और अपनी छवि पर भरोषा नहीं है जो एक एक वोट के लिए इतना बड़ा धोखा न सिर्फ देश के साथ बल्कि हर व्यक्ति के साथ... अब ये तो मैंने सिर्फ एक उदाहरण दिया... नेताजी ने इस तरह अपने पुरे परिवार को शहर ब का निवासी साबित कर रखा होगा... और वो सरे लोग अपने मूल निवास क्षेत्र के भी निवासी होंगे... मतलब संविधान के साथ भी मजाक... एक मत देने का अधिकार है और व्यक्ति एक ही समय में दो जगह का निवासी होने के साथ-साथ दो मत देने का अधिकारी भी है...
खुले-आम इस देश में संविधान और कानून का मजाक उड़ाते हुए व्यक्ति देश को धोखा दे रहा है... ऐसे लोगों के साथ क्या करना चाहिए? देश के साथ धोखा करने वाले को, देश में अपराध करने वालों को देश-द्रोही, अपराधी और गद्दार कहा जाता है तो क्या ऐसे लोगों को भी देश-द्रोही करार नहीं देना चहिये? ऐसे लोगों को भी सजा नहीं देना चाहिए? क्या ऐसे व्यक्ति हमारे नेता होने के लायक है? क्या ऐसे लोगों को अपना लीडर-अपना अभिभाभाक स्वीकार करना चाहिए? ये राजनितिक लोग तो अपराधी है ही क्या वो अपराधी नहीं है जो उनका साथ देने के लिए अपराध कर रहे है?
क्या लिखूं मैं? और आखिर क्यों लिखूं मैं? क्या फर्क पड़ जायेगा मेरे लिखने से या कुछ कहने से? ऐसे लोग न पहले सुधरे हुए थे और न आगे सुधरने वाले है... ऐसे लोग लाख खुद को साफ़-छवि का ईमानदार व्यक्ति कहे, दुनिया भले इनको इज्जत की नजर से देखती हो पर मैं न इन्हें स्वीकार पाता हूँ और न ही इनका सम्मान कर पाता हूँ... और न कभी करूँगा... मेरे ख्याल से ऐसे लोगों की उम्मीदवारी ख़त्म होनी चाहिए और ऐसे लोग जिन्होंने दुसरे शहरों में अपने नाम के वोटर-कार्ड बनवा रखे है उनकी इस देश की नागरिकता ख़त्म होनी चाहिए... पर आखिर ये करेगा कौन? जहाँ हर व्यक्ति अपने-आप में अपराधी हो वहां सजा देने का अधिकारी कौन है?
लेकिन बस ज़रा सोंचिये कि क्या ये सही है???



















